Sunday, April 14, 2024
Homeकाम की बातBlue Aadhar Card: जानें क्यों जरूरी है ब्लू आधार कार्ड? नहीं बनवाया...
Homeकाम की बातBlue Aadhar Card: जानें क्यों जरूरी है ब्लू आधार कार्ड? नहीं बनवाया...

Blue Aadhar Card: जानें क्यों जरूरी है ब्लू आधार कार्ड? नहीं बनवाया तो…

India News CG (इंडिया न्यूज़), Blue Aadhar Card: देश में लगभग हर किसी ने आधार कार्ड बनवा रखा होगा। शायद ही ऐसे कुछ लोग होंगे जिन्होंने अभी तक अपना आधार कार्ड नहीं बनवाया हो। सामान्य आधार कार्ड के अलावा नीला आधार कार्ड भी होता है।

इसे बनवाना भी जरूरी है। यह आधार कार्ड क्यों बनवाया जाता है, यह किसके लिए जरूरी है और इसे न बनवाने से क्या नुकसान हो सकता है। जानिए इस खबर में।

ANISR के ग्रेटर नोएडा वेस्ट आधार सेंटर के प्रभारी अनुज त्यागी का कहना है कि जिस तरह बुजुर्गों के लिए आधार कार्ड बनाया जाता है, उसी तरह 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी आधार कार्ड बनाया जाता है। इस आधार कार्ड को नीला आधार कार्ड कहा जाता है। इसे बनवाना जरूरी है।

5 साल से कम उम्र के बच्चों के पास नहीं होती बायोमेट्रिक्स

नीला आधार कार्ड बनाने की विधि बहुत आसान है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों के पास बायोमेट्रिक्स नहीं है। कार्ड में फोटो की आवश्यकता नहीं है। बच्चे को आधार केंद्र ले जाने की जरूरत नहीं है। नवजात या 5 साल से कम उम्र के बच्चों के आधार कार्ड के लिए केवल जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।

ध्यान रहे कि यह प्रमाण पत्र नगर निगम का ही होना चाहिए। यह मान्य है। अस्पताल का जन्म प्रमाण पत्र मान्य नहीं है। इसके साथ ही परिवार के मुखिया का आधार कार्ड अनिवार्य है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि जन्म प्रमाण पत्र में माता-पिता का नाम आधार जैसा ही होना चाहिए। अगर नाम में कोई बदलाव होता है तो आधार कार्ड नहीं बनेगा।

परेशानी हो सकती है

आमतौर पर इतने छोटे बच्चे के लिए आधार कार्ड की जरूरत नहीं होती है, लेकिन कभी-कभी अचानक पहचान पत्र की जरूरत पड़ जाती है। उदाहरण के लिए, पासपोर्ट या वीज़ा प्राप्त करना आवश्यक है। अगर उस वक्त आधार नहीं बनवाया तो परेशानी हो सकती है। इसलिए पांच साल से कम उम्र के बच्चे का नीला आधार कार्ड समय पर बनवा लेना चाहिए।

इस उम्र के बाद अपडेट जरूरी

बच्चों के वयस्क होने से पहले उनके आधार कार्ड को 2 बार अपडेट कराना अनिवार्य है। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आधार काम नहीं आएगा। पहली बार जब बच्चा पांच साल का हो जाए तो उसे आधार केंद्र पर ले जाकर उसका बायोमेट्रिक्स बनवा लें और दूसरी बार 15 साल की उम्र में उसका बायोमेट्रिक्स अपडेट कराना अनिवार्य है।

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